रुद्रास्त्र और माहेश्वरास्त्र - शिवजी के महाघातक अस्त्र | Rudrastra - Maheshwarashtra Weapons


(रुद्रास्त्र और माहेश्वरास्त्र - शिवजी के महाघातक अस्त्र | Rudrastra - Maheshwarashtra Weapons) भगवान शिव के दैवी अस्रो का जब भी जिक्र होता हे तब पशुपतास्र(Pashupatastr) का नाम आता हे, और शस्त्रो मे त्रिशूल के बारे मे चर्चा होती हे. लेकिन बहोतसे लोगो को भगवान महादेव के अन्य अस्त्रोके बारे में जानकारी नहीं हे. रामायण के युद्ध मे भगवान शिव के दो अन्य अस्त्रोके बारेमे जानकारी मिलती हे.

mythological weapons शृंखला में आज हम आपको बतायेंगे रुद्रास्त्र (Rudrastra) और महेश्वरास्त्र (Maheshwarastra) भगवान् महादेव के दो और महाप्रलयकारी अस्त्रोके बारे मे. स्वागत हे आपका मिथक टीवी कि Official website मे.
Maheshwarastra Rudrastra

रुद्रास्त्र (Rudrastra)

रूद्र शब्द का अर्थ होता हे महाभयंकर और इसे भगवान शिव के संहारक रूप के लिए उपयोगित किया जाता हे. माना गये हे रुद्रास्त्र, वो अस्त्र था जो भगवान शिव के अंश जिसे रूद्र भी कहा जाता हे, उससे संलग्न था. पुरानो के अनुसार रुद्रास्त्र अपनेआप में १ पुरे रूद्र की ताकद समाये रख्खा था. जब कभी रुद्रास्त्र को आवाहित किया जाता, तो ११ वे रूद्र की ताकद उसमे समा जाती. फिर एक महाभयंकर आंधी आती और एक तूफान के साथ रुद्रास्त्र अपने लक्ष का विनाश कर देता था. रुद्रास्त्र एकसाथ हजारो दुश्मनों को मारने की काबिलियत रखता था. रुदास्त्र का मुकाबला करना यानि रूद्र का मुकाबला करना होता था.
Rudra


महाभारत और रुद्रास्त्र (Rudrastra in Mahabharata)

महाभारत युद्ध के समय कर्ण ने इस अस्र का उपयोग अर्जुन पर किया तब इस अस्रने भगवन महादेव से अर्जुन को प्राप्त शिवकवच को नष्ट कर अर्जुन को घायल कर दिया था. सिर्फ रुद्रास्त्र ही भगवान महादेव के दिए शिवकवच को नष्ट कर सकता था और अन्य कोई अस्त्र शिवकवच को छु भी नही सकता था. भगवान् कृष्ण और शिशुपाल के युद्ध के समय भी इस अस्त्र के उपयोग का उल्लेख मिलता हे.
rudrastra maheshwarastra

माहेश्वरास्त्र (Maheshwarastra)

माहेश्वर शब्द का अर्थ हे, वो जिसकी इच्छा के अनुसार संपूर्ण ब्रम्हांड चलता हे. माहेश्वरास्त्र वो अस्त्र था जिसमे भगवान शिव की तीसरी आंख की शक्ति समायी थी. जब भी महेश्वरास्त्र को आवाहित किया जाता तब भगवन शिव की तीसरी आंख से निकलने वाली आग की तरह एक तेज आग की लहर लक्ष पर पड उसे नष्ट कर देती थी, ये ज्वालाये इतनी तीव्र और ताकदवर होती थी की ये सृष्टि की महानतम शक्ति को भी ये नष्ट कर सकती थी. जिस तरह क्रोधित भगवान् महादेव को सिर्फ भगवान विष्णुही शांत कर सकते हे या किसी और शब्दों में कहे तो भगवान शिव और भगवान् विष्णु एकदूसरे को संतुलित करते हे. उसी तरह महेश्वरास्त्र को शांत करने का एक ही उपाय था वो ये की इसके खिलाफ भगवान विष्णु के बनाये किसी अस्त्र का उपयोग करना. माहेश्वरास्त्र को अगर उसकी पूर्ण क्षमता से चलाया जाय तो वो शिवजी की तीसरी आंख की तरह पूरी दुनिया को जलाने की ताकद रखता था.



रुद्रास्त्र और महेश्वरास्त्र भगवान शिव की दो भिन्न प्रकृतियो को दर्शाते हे, रुद्रास्त्र एक तूफान की तरह काम करता हे तो माहेश्वरास्त्र आग की तरह.

माहेश्वरास्त्र और रामायण (Maheshwarastra in Ramayana)

रामायण मे जब रावणपुत्र इन्द्रजीत और लक्ष्मण में युद्ध चल रहा था तब इस युद्ध में इन्द्रजीतने भगवान शिवके दोनों अस्त्र रुद्रास्त्र और महेश्वरास्त्र का उपयोग किया गया था. कई विद्वानों का मानना हे की इस युद्ध के दौरान इंद्रजित ने पाशुपतास्र का उपयोग किया था पर वर्णनों के अनुसार हमें ये पता चलता हे की इस युद्ध के दौरान इन्द्रजीत ने जिन अस्त्रों का उपयोग किया वे रुद्रास्त्र और महेश्वरास्त्र ही थे.
Maheshwarastra


पाशुपतास्त्र शिवजी का इजाद किया हुवा सबसे शक्तिशाली अस्त्र था और रुद्रास्त्र और महेश्वरास्त्र से काफी ज्यादा ताकदवर था.

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