Karna's Mysterious Kavacha-Kundala:- कर्ण के दिव्य कवच कुंडल


Karn's Mysterious Kavacha Kundala


Karna's Mysterious Kavacha-Kundala:- कर्ण के दिव्य कवच कुंडल | सभी को महावीर कर्ण तो पता हे, जो कवच कुंडलो के साथ जन्मा था, पर लगभग न के बराबर लोगो को उसके कवच कुंडल के बारे मे सही-सही जानकारी हे. आज के article मे हम बात करेंगे दानवीर कर्ण(Karna) के दिव्य कवच और कुंडलो(Kavacha Kundala/ Divine Armour and Earring) के बारे मे.



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कवच और कुंडल(Kavacha- Kundala)


लगभग सभी लोग कर्ण के कवच को ज्यादा महत्व देते हे, और वे कईबार तो कुंडल को भूल भी जाते हे. पर वास्तविकता में कवच की शक्ति कुण्डलो से ही थी. और अगर ये कहे तो गलत नहीं होगा की कुंडल, कवच की शक्ति और अभेद्यता का source थे. वेदव्यास लिखित महाभारत में कुण्डलो को उतनाही महत्व हे जितना की कवच को

क्या आपको पता हे कैसे हुवा कवच और कुण्डलो का निर्माण? (Origine Of Kavacha-Kundala)

"आदि पर्व के १९१ वे अध्याय में एक कथा आती हे, जिसके कारण हमे कर्ण के कवच और कुंडलो के साथ जन्म लेणे का निश्चित कारण समझ मे आता हे"

दुर्वासा ऋषिके कुन्तिभोज के यहाँ वास्तव्य के दौरान कुंती उनकी मनोभावे सेना कर उनसे दिव्य मंत्रो की प्राप्ति करती हे. दुर्वासा के जाने के बाद कुंती इन मंत्रो की शक्ति परखने के लिए उनका प्रयोग करती हे और भगवान सूर्य को अपने मंत्रो से बुला लेती हे, तो सूर्यदेव कुंती से वरदान मांगने को कहते हे. तब कुंती कहती हे की, वो नहीं चाहती उसका पुत्र किसी साधारण शक्तिके साथ जन्म ले और वे चाहती हे की उनका पुत्र ऐसे कवच और कुण्डलो के साथ जन्म ले जो अभेद्य हो. तब सूर्यदेव कहते हे की उनके पास उनकी माता अदिति के दिए कुंडल हे ... जो अमृत से बने हे और साथ ही वे एक अभेद्य कवच अपने पुत्र को देंगे जो भी अमृत से बना होगा.


अगर आप को नहीं पता तो अमृत की महिमा की एक कथा जानले, जब राहू ने अमृत पिया था तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्रसे राहू का वध करने की चेष्टा की थी ... पर राहू के जिस अंग में अमृत पोहच पाया उस अंग को सुदर्शन चक्र भी नष्ट नहीं कर पाया था.
कहा जाता हे की, अमृत त्रिदेवो की एकत्रित शक्तियोंसे बना हुवा एक ऐसा विशेष तत्व हे जिसे न काटा जा सकता, न तोडा जा सकता हे और न ही नष्ट किया जा सकता हे



कितने शक्तिशाली थे कवच और कुंडल ? (Karna's Kavacha Kundala: Indestructible)


काफी बार हमारे अनेक मित्र कमेन्ट में कहते हे की अर्जुन के पास इतने भयानक अस्त्र और शस्त्र थे की ये मुमकिन नहीं था की कवच कुंडल उनके आगे टिक सके. कर्ण के कवच कुंडल साधारण नहीं थे, और इंद्र को इसकी शक्ति का पूरा अंदाजा था इसीलिए स्वर्ग का राजा इंद्रने एक याचक बनके कर्ण के सामने झोली फैलाई. भगवन कृष्ण स्वयं एकबार कहते हे की अगर कर्ण के पास कवच और कुंडल होते तो में खुद अपने सुदर्शन चक्र और अर्जुन अपने गांडीव के साथ मिलकर भी उसे भेद नहीं सकते थे.

द्रोन पर्व के १५५वे अध्याय में इसका प्रमाण मिलता हे. गीता प्रेस की महाभारतमें भी इसका वर्नन किया हुवा हे.
  

आप खुद कल्पना कर सकते हे, सुदर्शन चक्र जो ब्रह्माण्ड के सबसे भयानक शस्त्रोंमेंसे एक हे और जिसकी तुलना भगवान महादेव के त्रिशूलसे की जाती हे.. वो खुद भगवान कृष्ण के मुताबिक अमृत द्वारा निर्मित कवच-कुण्डलो को भेद नहीं सकता था.

तो अब आप कमेन्ट में बताये की क्या अर्जुन के साधारण अस्त्र क्या कर्ण के कवच कुण्डलो को भेद सकते थे ?

कुण्डल की विशेषता? (Importance Of Kundala)


कुण्डलो के रहने से कर्ण की उम्र एकतरहसे ठहर जाती थी, कुंडल कर्ण को इतनी उर्जा प्रदान करते की कर्ण हमेशा एक युवा की तरह जोश में रहता था. कुरुक्षेत्र युद्ध में कर्ण को अनेको बार उसे एक युवा योद्धा कहा गया हे. भगवन कृष्ण तो कवच कुण्डलो को अभेद्य मानते थे, युधिष्ठिर भी कर्ण की कुशलता और कवच कुंडल की अभेद्यता के कारन रात में मुश्किल से सो पते थे... महाभारत में एक जगह वर्णन मिलता हे की पांडव १३ सालो तक कर्ण के कारन चैन की नींद नही सो पाए थे.



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