Sunday, August 6, 2017

होलो अर्थ सिधांत - The Hollow Earth Theory

होलो अर्थ सिधांत - The Hollow Earth Theory

२०१४ में, University OF Alberta के प्रोफेसर ग्रेम पियरसन.... जो एक हीरे के अन्दर के महत्वपूर्ण material पर खोज कर रही वैज्ञानिको की इंटरनेशनल टीम के प्रमुख थे, उन्हें उस हीरे के अन्दर ringwoodite  नाम का मिनरल मिला जो काफी चौकाने वाला था, और इसके मिलने की उन्हें आशा भी नहीं थी, क्यों की ringwoodite उस से पहले सिर्फ उल्काओ में ही मिला था, ये ऐसा पहला मौका था जब पृथ्वी के अन्दर से ये मिनरल निकला हो. शोध से ये पता चला की किम्बरलाइट नाम का वोल्कानिक पत्थर उस हीरे को पृथ्वी की सतह पर ले आया था. पर आगे के शोध से इससे भी ज्यादा चौकादेने वाली बात सामने आई. वो थी की इस मिनरल के अन्दर मारी मात्र में पानी मिला, और वो पानी २५० से ३५० मिल या उससे भी निचे पृथ्वी के अन्दर बना था. पृथ्वी के इतने अन्दर पानी होने के इस सबुत ने पूरी दुनिया को चौका दिया.

ग्रेम पियरसन के अनुसार " इस पत्थर ये साबित होता हे की, पृथ्वी के बहोत अन्दर कुछ "wet पॉइंट्स" हे, और वे एकतरह के Transition zone हे, जो किसी बड़े समुद्र के हे जिसका पानी शायद हमारे सातों समुद्रो से भी ज्यादा हो."

अगर सचमुच पृथ्वी के अन्दर कोई महाकाय समुन्दर हे तो आज की प्रचलित Seismic Wave Theory of Earths Interior बुरी तरह से fail हो जाएगी और हमें सालो पहले बनी "Hollow Earth Theory" को फिर से नए सिरे से देखना पड़ेगा.

ब्रम्हांड की उत्पत्ति कैसे हुयी, और क्या हमारे अलावा किसी और ग्रह पर जीवन हे, इन्सान की आजतक समझ में न आये ऐसे कई प्रश्नों के उत्तर तलाशने के लिए इन्सान अपने ग्रह से बाहर निकलकर ब्रम्हांड की यात्राये कर रहा हे. इन्सान की जिज्ञासा यही समाप्त नहीं होती और आज हम अपनी आकाशगंगा milky-way से बाहर निकलकर शोध करने की चाह रखते हे. पर जो इन्सान अंतरिक्ष की तलाश में बड़े बड़े मिशन चला रहा हे, उसे अपने खुद के ग्रह पृथ्वी के बारे में... कुछ ज्यादा नहीं पता, हम पृथ्वी के सिर्फ ८ मिल अन्दर तक जा चुके हे जो की पृथ्वी की outer कोर से १४०० मिल दूर हे, और इसी कारन पृथ्वी की संरचना के बारे में हमारा ज्ञान अभी ना के बराबर हे, और जितना भी हम जानते हे वो पूरा Assumptions पर ही आधारित हे.

आधुनिक विज्ञान के अनुसार पृथ्वी प्याज की तरह अन्दर से अलग-अलग परतो से बनी हुयी हे. और पृथ्वी की उपरी परत यानि crust भूमि की ठोस परत हे, इसके बाद का Upper mental, lower mental, Outer कोर और inner कोर हे, inner Cor जो की सबसे heavy पदार्थो से बनी हे ऐसा माना जाता हे. और इन चारो के भी बहोत से sub-layers हे.

पृथ्वी के अन्दर क्या हे, ये निष्कर्ष direct और indirect दोनों तरह के अभ्यासों के आधार से निकले जाते हे, direct ऑब्जरवेशन में पृथ्वी के अन्दर से बहार आये हुए पदार्थो का अभ्यास किया जाता हे पर जिन पदार्थो का हम अभ्यास करते हे वो पृथ्वी के बहोतही उपरी परतो में से होते हे. Indirect ऑब्जरवेशन में seismic waves यानि भूकंपिय तरंगो का अध्ययन होता हे और इसे ही सबसे ज्यादा विश्वसनीय माना जाता हे.

हमारी पृथ्वी के अन्दर क्या हो सकता हे, इसके लिए एक और theory काफी समय से सामने आई हुयी हे, और वो भी पूरी तरह assumptions पर ही आधारित हे, क्योकि पृथ्वी के अन्दर आजतक कोई भी नहीं जा सका हे. इस थ्योरी को हम hollow Earth Theory कहते हे.

कुछ शोधकर्ताओ के अनुसार, हो न हो पृथ्वी अन्दर से खोकली हे. और शायद वहा पर अन्य जिव होने की सम्भावनाये भी हे, जिसे the Hollow Earth theory नाम दिया गया. इस थ्योरी के प्रमुख supporter इग्लैंड के एडमंड हेले थे, हेले बहोत महान खगोलवैज्ञानिक और न्यूटन के समकालीन थे, Comets की कक्षा का सही से अंदाज लगाने के लिए विश्व में विख्यात थे और उनका नाम एक धूमकेतु देकर उन्हें सम्मानित किया गया हे, जिसे आज हम "हेले का धूमकेतु" कहते हे.

उस काल में ही हेले ने पृथ्वी की परतो का सिधांत बता दिया था, और उन्होने ये भी कहा था की ये परते एक-दुसरे से विपरीत दिशा में घुमती हे, और इनके चुम्बकीय क्षेत्र भी भिन्न हे. काफी सालो बाद आज विज्ञान ने इसे स्वीकार कर लिया हे. उनका ये भी कहना था एक हर दो परतो में एक खालीपन हे और वहा वातावरण के मौजूद होने के कारन हर एक परत में जीवन पनप सकता हे. हेले ने और बताया की हमारी पृथ्वी एक एटम की तरह हे और हर एक परत... इलेक्ट्रान की कक्षा की तरह हे. हेले के चुम्बकीय क्षेत्र के अध्ययन के अनुसार उस अन्दर की दुनिया में जाने का रास्ता उत्तरी या दक्षिणी ध्रुव सेही बनाया जा सकता हे.

स्विस गणितज्ञ और भौतिकी के वैज्ञानिक लेयर हार्ट ओयलर भी इसी में यकीं रखते हे.... ओयलर दुनिया के आजतक के कुछ सबसे महान वैज्ञानिको के मेंसे एक माने जाते हे. अपने जीवनी में उनके १००० से ज्यादा research publish हुये हे. उनके अनुसार भी पृथ्वी hollow हे और तो और centre में ६०० मिल redius का एक सूरज भी हे जो पृथ्वी के अन्दर के जीवन को प्रकाश देता हे, उनके अनुसार भी पृथ्वी के अन्दर उत्तरी या दक्षिणी ध्रुव सेही पुहचा जा सकता हे.
एक और अलग शोध में रुसी वैज्ञानिक फ़ेडरल निवोलिन ने, एकतरह से एडमंड हेले और ओयलर को पुष्टि दी हे.

उनके शोध के अनुसार शुरवात में पृथ्वी एक गरम गेसो का समूह थी, गुरुत्वाकर्षण के चलते इनमे एक कठिन कोर का निर्माण हुवा और उसके गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में गेसो का एक गोला बन गया और बाद में इसने ठंडा होना शुर किया, उपरी परत के ठंडा होने के कारन उसने उपरी परत को ढक लिया, और बाकि गेसो को अपने अन्दर बंद कर लिया, पर अन्दर से वो गरम गेसो का भंडार थी, और बेहद दबाव के चलते ये सारी गेसे उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव से बहार निकली, पर हजारो सालो के बेहद जलते हुए गेसो के कारन वो बेहद कठिन अंदरी कोर को गर्म और प्रकाशित बन गयी, और अन्दर के वातावरण के लिए वो ठीक उसी तरह काम करती हे जैसे हमारा सूर्य.

      हेले के नजरिये से देखे तो, नेवोलिन का सूर्य जैसे उसके द्वारा कहे गए एटम का केंद्र था. और ओयलर के सिधांत की भी पुष्टि करता था

ये तो हुवी वैज्ञानिक बाते पर असल जिंदगी में भी अमेरिका के एडमिरल रिचर्ड बर्न जिन्होंने दुनिया में पहली बार दक्षिण ध्रुव के ऊपर से विमान उडाया था, उनकी जीवनी में भी दक्षिण ध्रुव के उस निचे की दुनिया में जाने के रस्ते का जिक्र हे. १२ वि शताब्दी में वुलपिट शहर में मिले २ हरे रंग के बच्चे भी निचे की दुनिया से आने का दावा करते थे.

और एक interesting बात, हिटलर के नाजियो के बनाये हुए maps जो बहोत ही secret और mysterious Underground जगहो को बताते हे. और एक नाज़ी U-Boat के क्रूमेंबर का ख़त जिसमे साफ़ साफ़ लिखा हे की हम पृथ्वी के अन्दर तक पुहच गए हे और अब हम वापस नहीं आना चाहते.


आप क्या सोचते हे पृथ्वी के बारे में. ..??? साथही बताईये की आपको ये Article कैसा लगा.
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