रावण कि महा-मायावी तलवार - चंद्रहास खड्ग

भगवान शिव भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के बहोतसे दैवी अस्रो को आप आनेवाले कुछ articles में जानेंगे 
पर क्या आपको एक वेदिक मायावी तलवार के बारे में पता हे जो आपको गायब कर सकती थी, आपके खिलाफ जीतते हुए शत्रु को ये दिखा सकती थी की वो हार रहा हे ताकि वो डरकार भाग 
जाए.

नमस्कार मित्रो स्वागत हे आपका मिथक टीवी के वेब articles में. 
mythological weapons शृंखला में आज हम बात करेंगे भगवान महादेव
ने रावण को दिये अजेय खडग चंद्रहास तलवार कि साथ में हम ये जानने कि भी कोशिश करेंगे कि रावण ने इस खड्ग का उपयोग प्रभू राम के खिलाफ क्यू नही किया था ?
अगर आप के पास भारतीय पुरानो से... या हमारी किसी भी सीरिज से जुडी कोई अनसुनी कहानी हे तो आप हमे मेल कर सकते हे.

चंद्रहास को तलवार कहना एकतरह से गलत होगा क्योकी एक तलवार और खड्ग मे काफी फरक होता हे तलवार पतली सी और कम वजनदार होती हे तो वही खड्ग काफी भारी और मोटी होती हे. चंद्रहास का मतलब होता हे, चंद्रमा कि हसी. कई खुबियो वाले चंद्रहास खडक कि एक खुबी ये थी के वो आनेवाली light को किसी भी angle मी मोड सकता था या पूरी तरह absorb कर सकता था. अपनी इस काबिलियत के कारण ये एकतरह का Optical Illusion यानि दृष्टिभ्रम निर्माण कर सकता यांनी उदहारण के तौर पर अगर कोई योद्धा दाई और में खड़ा हो तो वो हमे बाई और नजर आएगा. उसी तरह ये खडग शत्रु को नजर ही नहीं आती थी क्योकि वो अपने और आनेवाले प्रकाश को अपने आरपार कर लेती थी.

चंद्रहास एक बहोत ही मायावी तलवार थी, एक महान योद्धा के हाथ में इसकी माया रचने की क्षमता हजारो गुना बढ़ जाती थी. चंद्रहास में एक ऐसी शक्ति थी जो एकसाथ हजारो की सेना को स्थिति के विपरीत चित्र दिखाने की काबिलियत रखती थी, उदहारण के तौर पर "अगर शत्रु जित रहा हो तो ये तलवार उसे दिखाएगी की वो हार रहा हे और उसके सैनिक इधर उधर दौड रहे हे"
प्राचीन युद्धशास्त्र में चंद्रहास खड़ग को सुदर्शन चक्र के समकक्ष माना गया हे. तो शस्रो मी ये त्रिशूल के बाद ये सबसे संहारक शस्र था.

रावण को चंद्रहास कैसे मिला इस कि भी एक interesting कहाणी हे.
एकबार रावण अपने पुष्पक विमान मी बैठकर उत्तर मे घूम रहा था. तब बीच मी कैलाश पर्बत आने कि वजह से रावण का विमान उसे पार नाही कर पाता. शक्ती कि मस्ती मी चूर रावण विमान से नीचे उतरकर पुरे पर्वत रास्ते से हटाने के लिये उठा लेता हे. तब भगवान महादेव रावण को सबक सिखाने के लिये हलके से अपने पाव को नीचे दबा देते हे. पुरा पर्वत नीचे गिर
ता हे रावण समय रहते अपना हाथ हटा लेता हे फिर भी उसकी कनिष्का यांनी सबसे छोटी उंगली को चोट आती हे.
असुर होने के बाद भी रावण एक महानपंडित भी था, वो भगवान शिव कि प्रसंसा करणे के लिये "शिवतांडव श्रोत्र" कि रचना कर उसे गाणे लगता हे. भगवान शिव इसे सुनकर काफी प्रसन्न हो जाते हे. और रावण को अपना चंद्रहास खड्ग वरदान के स्वरूप मी देते हे. साथ हि भगवान उससे कहते हे कि "अगर उसने इसका उपयोग किसी निहत्ये पर किया तो चंद्रहास वापस कैलाश चला आयेगा"
रावन ने रामायण युद्ध में चंद्रहास तलवार का उपयोग क्यों नहीं किया इसके बारे में भी हमे एक अलग कथा से पता चलता हे.

जब रावन ने माता सीता को अशोक वाटिका में से उठा लिया, तो महाबली रावन अपने पुष्पक विमान ने बैठकर लंका की और जाने लगा. जब जटायु ने ये देखा की रावण माता सीता को जबरन ले जा रहा हे, तो जटायु ने तात्काल रावन पर हमला बोल दिया. जटायु का हमला साधारण हमला न था न ही जटायु एक साधारण पक्षी था.
जटायु ने रावन को काफी घायल कर दिया था, वर्णनों के अनुसार जटायु ने रावण के दसो के दसो हाथो को अपने पंजे और चोंच से घायल कर दिया था. रावन ने भी कई तरह के बाण और शस्रो से जटायु पर हमला करा... जटायु इससे घायल जरुर हुवा पर फिर भी घायल जटायु ने रावन की पीठ पर इक भयानक हमला किया और उसकी पीठ को बुरी तरह चिर दिया. जटायु के आगे एक न चलने के बाद रावन ने एक दिव्य तलवार का उपयोग कर जटायु के पंख काट दिए और जटायु पर प्राणघातक वार किये.


जटायु निहत्ता था, फिर भी जब वो काबू में नहीं आ रहा था तब रावन ने मजबूरन चंद्रहास का उपयोग किया. युद्धनियमो के अनुसार ये अधर्म था और इसीकारण भगवान् शिव के कथन के मुताबिक उसी वक्त चंद्रहास कैलाश लौट गया
चंद्रहास का उपयोग क्यों नहीं किया इसका सही-सही उल्लेख पुरानो में नहीं मिलता पर जटायु वध में आखिर में उपयोगित दैवी तलवार का उल्लेख मिलता हे, उपयोग की गयी दैवी तलवार कोई साधारण दैवी तलवार थी ऐसा माने तो रावन ने इसका उपयोग आखिर मे किया नहीं होता
हमने हमारे space series के एपिसोड "hollow Earth theory" में बताया था. की चाँद और पृथ्वी में बुनियादी तौर पर काफी फर्क हे. कुछ लोगो का मानना हे की .... चंद्रहास का निर्माण चाँद के ऊपर पाए जाने वाले किसी मेटल से किया गया था.
शायद रामायण काल में हमारी पुहच चाँद से भी कही ज्यादा दूर थी.....!!!!

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