Friday, August 4, 2017

१९५२ का लंडन का कातील कोहरा - चीन में भी हो सकता हे

१९५२ का लंडन का कातील कोहरा - चीन में भी हो सकता हे

५ दिसम्बर १९५२, लन्दन की हवा में एक अजीब तरह का कोहरा फैला हुवा था, ये कोहरा ३० मिल लम्बा था जिसने पुरे लन्दन शहर को अपनी चपेट में ले लिया था. ये कोहरा इतना घाना था की खुले में लोग अपने खुद के पैरो को भी बड़ी दिक्कत से देख पा सकते थे.
ये कोहरा छोटे छोटे sulpher particles से भरा पड़ा था, पूरा लन्दन शहर किसी सड़े हुए अंडे की तरह smell कर रहा था.

९ दिसम्बर को जब ये कोहरा हटा, तब वो ४००० लोगो की जान ले चूका था, १.५० लाख लोग Respiratory Infection की वजह से गंभीर रूप से बीमार थे और जिनमे से ८००० से ज्यादा लोग इस बीमारी के कारन अगले कुछ महीनो में मर जाते हे.
england की ऑफिसियल रिपोर्ट माने तो, इस कोहरे की वहज से १२००० से काफी ज्यादा लोग मरे थे
इस कोहरे के कारण सिर्फ इन्सान ही नहीं मरे थे, बल्कि लाखो की तादाद में अन्य प्राणी भी मारे गए थे.
ये कोहरा कैसे आया, किन कारणों से इसका निर्माण हुवा ये किसी को पता नहीं.
ऐसाही एक कोहरा १९६२ में फिर एक बार आया था जिसने फिर ७५० से ज्यादा लोगो की जान ली थी
५० सालो से भी ज्यादा समय तक ये कोहरा दुनिया के लिए एक मिथक बना हुवा था, पर २०१७ में वैज्ञानिक इस मिथक को सुलझाने में कामयाब रहे हे.

संशोधको की एक टीम ने चीन के वातावरण में प्रयोग करके इस कोहरे के मिथक को सुलझाया हे.
लोगो को ये पता था की, salphate की वजह से ये नरसंहार हुवा हे, और बताया ये जाता हे की कोयले के जलने से निकालने वाले sulphur dioxide की वजह से ये हुवा हे, और इसी sulpher dioxide से sulphuric acid निर्माण हुवा.
पर sulphuric acid का sulphur dioxide से निर्माण हुवा कैसे ये किसी को पता नहीं था.
संशोधको की International टीम ने ये पता लगाया हे की, इस कोहरे की शुरवात nitrogen डाइऑक्साइड जो भी शायद कोयले के जलने से ही निकला था ने की थी न की sulpher डाइऑक्साइड ने. और इसी nitrogen डाइऑक्साइड के कारन ये कोहरा तयार होता हे
Nitrogen Oxide के कारन ही sulphur dioxide जो तुलनात्मक बहोत कम जहरीला हे उसका sulphuric acid में रूपांतरण होकर ये कोहरे को एक बहोत ही जहरीला बना देता हे. कोहरे के कुछ tiny particles से मिलकर sulphuric acid लोगो के Respiration through उनके अन्दर चला जाता हे, यहाँ हम आपको ये बतादे के sulphuric acid एक बहोत ही जहरीला पदार्थ हे, एक बूंद sulphuric acid भी आपका पूरा हाथ जला सकता हे. लन्दन कोहरे के वक्त sulphuric acid dilute फॉर्म में कोहरे के particles से mix हुवा था. अगर ये concentrated sulphuric acid होता तो, शायद आज लन्दन दुनिया के नक़्शे पर ही नहीं होता.
चीन जो दुनिया के सबसे polluted देशो मेंसे एक हे, वह भी ऐसा कोई हादसा होने की संभावना हे, चीन में भी बहोत बार ऐसे कोहरे फ़ैल चुके हे पर, लन्दन का कोहरा एसिडिक था पर चीन में आजतक फैले हुए कोहरे nutral हे.

आजहम तरक्की के नाम पर जो भी कुछ कर रहे हे, क्यों वो वाकई तरक्की हे.
हम ये मानते हे आज हमारे पास हमारे पिता या दादा के मुकाबली काफी ज्यादा संसाधन हे, पर क्या हम हमारे पिता या दादा जैसी शांत और सुखी जिंदगी जि पा रहे हे.
पूरी इंसानी सभ्यता आज एक दौड़ में भाग रही हे, शायद इस दौड़ का अंत इंसानी सभ्यता का अंत तो नहीं???
उजाला करने के लिए हम शायद अपना ही घर जला रहे हे, हमारी पृथ्वी को तबाह कर रहे हे.


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